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2020-12-09

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ऑल इंडिया किसान संगठन के राजा राम सिंह का कहना है कि उन्हें सरकार का प्रस्ताव मिला है. सरकार ने MSP जारी रखने, APMC को मजबूत करने, प्राइवेट कंपनियों के रजिस्ट्रेशन की बात कही है. सरकार के प्रस्ताव पर अब बैठक की जाएगी. 

किसानों को सरकार की ओर से दिए जा सकते हैं ये प्रस्ताव.

  • APMC एक्ट में बदलाव, फ्री मंडी में भी समान टैक्स, पहले फ्री मंडी में टैक्स नहीं था.
  • विवाद होने पर स्थानीय कोर्ट जाने का भरोसा, पहले सिर्फ SDM के पास जा सकते थे.
  • फ्री ट्रेडर्स के लिए रजिस्ट्रेशन सुविधा, पहले सिर्फ पैन कार्ड से काम चल सकता था.
  • कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में बदलाव, किसान की जमीन की सुरक्षा का भरोसा.
  • MSP पर सरकार लिखित गारंटी देने को तैयार.
  • पराली जलाने के मसले पर सख्त कानून में नरमी. 

किसान संगठनों की बैठक

सिंघु बॉर्डर पर किसान संगठनों की बैठक हो रही है. अभी पंजाब के 32 किसान संगठन सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग कर रहे हैं. इसके बाद आठ अन्य संगठन भी आएंगे, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन की बैठक होगी. हालांकि, किसान नेता जगजीत सिंह दलेवाल ने बताया कि अभी हमारे पास सरकार का कोई प्रपोजल नहीं आया है, जैसे ही वो मिलेगा किसान नेता चर्चा करेंगे. किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि ये किसानों के सम्मान की बात है, ऐसे में किसान अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे. सरकार ने सिर्फ संशोधन का प्रस्ताव भेजा है, जो किसानों को मंजूर नहीं है.

दो बजे बीजेपी की पीसी

किसानों के आंदोलन के बीच दोपहर दो बजे बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और नेता भूपेंद्र यादव इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे. 

सरकार ने किसानों को भेजा लिखित प्रस्ताव

कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों को सरकार ने अपना प्रस्ताव भेजा है. जिसमें मौजूदा कानूनों में संशोधन शामिल हैं, इनमें किसानों की मांग को शामिल किया जा रहा है.

चर्चा की तैयारियों में किसान

संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक अक्षय कुमार ने कृषि कानून के मसले पर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है. दूसरी ओर आज किसान नेताओं की मीटिंग हिंदुस्तान टाइम्स गैलरी हॉल सिंघु बॉर्डर पर होगी. इसमें वह तमाम 40 किसान नेता इस बैठक में शामिल होंगे जो सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं.

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सुखबीर बादल और शरद पवार की मुलाकात

किसानों के आंदोलन के बीच विपक्ष अपनी रणनीति बनाने में जुटा है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में बुधवार को एनसीपी नेता शरद पवार और अकाली दल के सुखबीर बादल की बैठक चल रही है. इससे पहले अकाली दल नेता प्रेम चंदूमाजरा शरद पवार से मिलने उनके घर आए थे. चंदूमाजरा ने कहा है कि शरद पवार भी चाहते हैं कि मुद्दे का हाल बातचीत से निकले. अगर सरकार ने किसानों की बात नहीं मानी तो तो आगे उसी के हिसाब से रणनीति बनेगी. बता दें कि आज शाम को विपक्ष को इस मसले पर राष्ट्रपति से मिलना है. 

राहुल का सरकार पर वार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर फिर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट किया कि पीएम मोदी की अगुवाई में रिफॉर्म का मतलब चोरी होती है, इसलिए इन्हें लोकतंत्र से छुटकारा चाहिए.  

Krishi Bill 2020: कृषि बिल पर क्या है एमएसपी विवाद, आखिर क्यों इसका विरोध कर रहे हैं किसान

केंद्र सरकार द्वारा लाये गये नये कृषि बिल का जबरदस्त विरोध हो रहा है. पूरे देश में किसानो ने बिल के विरोध में प्रदर्शन किया. कृषि बिल के विरोध में जहां एक और केंद्र सरकार में मंत्री रही हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया वहीं विपक्ष भी लगातार इस बिल का विरोध कर रहा है. राहुल गांधी ने बिल को काला कानून बताते हुए कोर्ट जाने की बात कही है.

बिल को लेकर किसानों और विपक्ष का आरोप है कि इससे मंडी व्यवस्था समाप्त हो जायेगी और किसानों को फसलों की एमएसपी न्यूनतम समर्थन मूल्य) नहीं मिल पायेगी किसान संगठनों का आरोप है कि यह बिल किसानों के हित में नहीं है. इस बिल से किसानों के खेतों और मंडियों में बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों का कब्जा हो जायेगा. जबकि सरकार का दावा है कि कृषि में लाए जा रहे बदलावों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी, उन्हें नए अवसर मिलेंगे. बिचौलिए खत्म होंगे. इससे सबसे ज्यादा फायदा छोटे किसानों को होगा. किसान मंडी से बाहर भी अपना सामान ले जाकर बेच करते हैं.

हालांकि प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री बार बार यह कह रहे हैं कि एमएसपी और मंडी व्यवस्था पहले की तरह ही रहेगी. पर इसे लेकर किसान संगठन यह चाहते है कि सरकार इसका कानून बना दें. किसान चाहते है कि सरकार एमएसपी को लेकर कानून बना दें. जिससे किसान मंडी या उसके बाहर सरकार द्वारा तय एमएसपी पर अपना उत्पाद बेच पायें.

लोकसभा में इसे लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिहं तोमर ने भी कहा था कि एमएसपी भी रहेगा और कृषि मंडियां भी रहेंगी. अब किसान देश में कहीं पर भी मंडी के बाहर भी अपनी फसल, किसी भी कीमत पर बेचने को स्वतंत्र है. अब बिल की मुख्य बातों पर गौर कर करें बिल कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 है जो एक ऐसा क़ानून होगा जिसके तहत किसानों और व्यापारियों को एपीएमसी की मंडी से बाहर फ़सल बेचने की आज़ादी होगी. इसे लेकर सरकार कह रही है कि मंडियां बंद नहीं हो रही है. सिर्फ किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था दी जा रही है जिसके तहत वह किसी भी खरीदार को अच्छे दाम पर अपनी फसल बेच सकता है.

कृषक (सशक्‍तिकरण व संरक्षण) क़ीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर क़रार विधेयक, 2020 है. यह ऐसा बिल है जिसके तहत किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए एक ढांचा मुहैया कराया जायेगा. फिर जब कांट्रैक्ट एक्ट सेवा में आएगा और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लग जाएगा. यानी अब खलिहान में भी टैक्स लगेगा. मार्केंटिंग में कोई विवाद हुआ अथवा फसल की गुणवत्ता सही नहीं रही तो पैसा नहीं मिलेगा. इसकी गारंटी किसी ने नहीं ली है.

क्या है एमएसपी

किसानों को अपने फसल में नुकसान नहीं हो इसके लिए देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था लागू की गयी है. इसमें अगर फसल की कीमत बाजार के मुताबिक कम मिलती है तो सरकार उसे एमएसपी के हिसाब से खरीद लेती है. ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके. एमएसपी पूरे देश के लिए एक होती है.

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