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2020-08-06

बेरूत धमाके से तबाह हुआ लेबनान, नहीं बचा एक महीने का भी अनाज

बेरूत धमाके से तबाह हुआ लेबनान, नहीं बचा एक महीने का भी अनाज

लेबनान की राजधानी बेरूत में मंगलवार को हुए भयावह धमाके के बाद एक और बड़ी त्रासदी आती दिख रही है. बेरूत के बंदरगाह इलाके में हुए धमाके  में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं. बेरूत से बाहर के इलाकों को भी दहला देने वाले इस धमाके के बाद हर तरफ तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे लेबनान पर चौतरफा मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है.

धमाके की वजह से बंदरगाह में बना एक विशाल अन्नागार भी बर्बाद हो गया है. ये खाद्य भंडार पूरे लेबनान का सबसे बड़ा भंडार था. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अब लेबनान के पास एक महीने से कम वक्त के लिए अनाज नहीं बचा है. बेरूत धमाके की इससे बुरी टाइमिंग नहीं हो सकती थी. लेबनान के तमाम लोग पहले ही आर्थिक संकट की वजह से भूखे पेट सोने को मजबूर हैं.

बेरूत के अन्न भंडार के बर्बाद होने से लेबनान में बड़ा खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है. विश्लेषकों का कहना है कि लेबनान का 85 फीसदी अनाज इसी भंडार में रखा हुआ था यानी आने वाले वक्त में इस धमाके की तबाही बेरूत के बाहर भी महसूस की जाएगी.

वर्ल्ड विजन एनजीओ के डायरेक्टर हांस बेडरस्की ने बिजनेसइनसाइडर से कहा, बंदरगाह तबाह हो चुका है और ये बंदरगाह आयात के रास्ते आने वाले अनाज का मुख्य जरिया था. अब ये कई हफ्तों या फिर महीनों तक बंद रहेगा. इससे ना केवल बेरूत बल्कि लेबनान के बाकी हिस्सों पर भी गंभीर असर पड़ेगा.
बेरूत के गवर्नर ने कहा कि धमाके की वजह से करीब 3 लाख लोग बेघर हो गए हैं. बंदरगाह का जो इलाका ऊंची-ऊंची इमारतों और जहाजों से घिरा था, वे अब मलबे में तब्दील हो गए हैं, सड़कें दरक गई हैं और तमाम इमारतें ढह चुकी हैं.

लेबनान अपनी जरूरत का 80 फीसदी अनाज दूसरे देशों से आयात करता है जिसमें गेहूं सबसे ज्यादा खरीदा जाता है. पिछले महीने ही, यहां आटे की कीमत बढ़ने के बाद विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे.
लेबनान के वित्त मंत्री ने कहा है कि उनके देश में एक महीने से भी कम वक्त के लिए अनाज बचा है लेकिन खाद्यान्न संकट टालने के लिए पर्याप्त आटा है. वित्त मंत्री रॉल नेहमे ने रॉयटर्स से बताया कि मंगलवार को हुए विनाशकारी धमाके के बाद लेबनान को कम से कम तीने महीनों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है. मंत्री ने कहा, यहां भुखमरी संकट पैदा नहीं होगा.

अक्टूबर 2019 से ही यहां लोग सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. लेबनान की सरकार के भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की वजह से यहां की मुद्रा की हालत पस्त हो गई. एक साल से ही मांस से लेकर ब्रेड तक खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं.
यूएन रिलीफ ऐंड वर्क एजेंसी फॉर फिलीस्तनी के प्रवक्ता तमारा अलरिफई ने कहा, "यहां आर्थिक संकट है, राजनीतिक संकट है, स्वास्थ्य संकट है और अब ये भयावह धमाका. लेबनान में जो कुछ भी हो रहा है, उसकी तमाम परतें हैं और ये सब लेबनान के लोगों के सब्र की लगातार परीक्षा ले रहा है."

ये धमाका इतना भयानक था कि घटनास्थल से नौ किमी दूर  अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के शीशे टूट गए. ये किसी भूकंप के झटके के बराबर था. अभी तक इस धमाके की सटीक वजह पता नहीं चल सकी है. हालांकि, राष्ट्रपति माइकेल ऑन ने कहा है कि बंदरगाह पर बिना सुरक्षा मानकों के पिछले छह सालों से टनों अमोनियम नाइट्रेट रखा हुआ था. आशंका जताई जा रही है कि इसी से ये भयानक विस्फोट हुआ.
विश्लेषकों का कहना है कि लेबनान धमाका बहुत ही विंध्सवंसक था. लेवेंट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर समी नादेर ने कहा, वास्तव में ये बहुत बड़ी तबाही थी. धमाके की तीव्रता पर अब भी यकीन नहीं होता है.'

मैंने लेबनान में गृह युद्ध को झेला है, 2005 में पूर्व प्रधानमंत्री की जम बम धमाके में हत्या कर दी गई थी तो भी मैं प्रत्यक्षदर्शी था लेकिन आज तक ऐसा कुछ नहीं देखा था. धमाके में तबाह हुआ बंदरगाह लेबनान का मुख्य ट्रेड रूट था जहां पर अनाज, गैस, तेल और दवाओं की आपूर्ति होती थी. सब कुछ पूरी तरह से तबाह हो चुका है. फिलहाल, हमें एक-एक डॉलर की सख्त जरूरत है.
बेरूत के गवर्नर ने अल हदत टीवी से बताया कि धमाके से करीब 10 अरब डॉलर से 15 अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका है. इस आंकड़े में धमाके से दूरगामी नुकसान भी शामिल है. गवर्नर ने कहा कि देश में मौजूद अनाज की मात्रा बहुत सीमित है और उन्हें लगता है कि अगर अंतरराष्ट्रीय मदद ना मिली तो लेबनान एक बहुत बड़ी त्रासदी में फंस सकता है.
बेरूत के मेयर जमाल इतानी ने रॉयटर्स से कहा, यहां के हालात किसी युद्ध के बाद के लग रहे हैं. धमाके से हुए नुकसान का अंदाजा लगाने के बाद कह सकता हूं कि अरबों डॉलर्स का नुकसान हुआ है. इस मुश्किल घड़ी में दुनिया भर के देश लेबनान की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं.

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